उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लॉक स्थित मल्ला गांव में सुबह अपनी ‘छान’ (गौशाला/खेत) की ओर जा रहे 55 वर्षीय ग्रामीण जगबीर सिंह रावत पर भालू ने अचानक हमला कर दिया।
हमले में जगबीर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के पश्चात उन्हें जिला अस्पताल, उत्तरकाशी रेफर किया गया है, जहाँ वे भर्ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि भालू लगातार आबादी और घरों के आसपास देखा जा रहा है। इस घटना के बाद इलाके में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त और निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रोक लगाई जा सके।
डुंडा: पहाड़ी क्षेत्र में सड़क किनारे वर्षों से यातायात के लिए नासूर बना विशालकाय पत्थर आखिरकार हटा दिया गया है।
‘उत्तरदीपटुडे’ द्वारा प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए जाने और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा के बाद प्रशासन हरकत में आया।
इसके बाद कार्यदाई संस्था ने सक्रियता दिखाते हुए जेसीबी मशीन की मदद से पत्थर को तोड़कर मार्ग से पूरी तरह साफ कर दिया। यह पत्थर लंबे समय से मार्ग को संकरा कर रहा था, जिससे वाहनों की आवाजाही में रुकावट आ रही थी और लगातार दुर्घटना का खतरा बना रहता था।
स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। पत्थर हटने के बाद अब मार्ग सुगम हो गया है, जिससे सड़क सुरक्षा में सीधा सुधार होगा। स्थानीय नागरिकों ने इस त्वरित कार्रवाई का स्वागत करते हुए ‘उत्तरदीपटुडे’ का आभार जताया है। साथ ही प्रशासन और कार्यदाई संस्था से मांग की है कि क्षेत्र में इसी तरह अन्य आवश्यक सफाई कार्यों और सड़क सुरक्षा संबंधी समस्याओं को भी प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।
उत्तरकाशी के श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय में आयुर्वेदिक चिकित्सा (बीएएमएस) सत्र 2023 बैच के छात्र-छात्राओं के सब्र का बांध आज टूट गया। लंबे समय से प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लटके होने से नाराज छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर जोरदार प्रदर्शन किया।
धरने पर बैठे छात्र-छात्राओं का कहना है कि सत्र लगातार पिछड़ रहा है और विश्वविद्यालय प्रशासन प्रैक्टिकल परीक्षाएं कराने को लेकर गंभीर नहीं है। छात्रों ने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 25 सितंबर तक हर हाल में उनकी प्रयोगात्मक परीक्षाएं पूरी करवाई जाएं। यदि तय समय सीमा के भीतर समाधान नहीं निकला, तो छात्र अनिश्चितकालीन व उग्र आंदोलन शुरू करेंगे, जिसका पूरा दायित्व विश्वविद्यालय प्रबंधन का होगा।
प्रशासन का पक्ष: वहीं, मामले के तूल पकड़ने के बाद श्रीमती मंजीरा देवी विश्वविद्यालय प्रबंधन ने छात्रों को शांत कराने का प्रयास किया। संस्थान प्रशासन का कहना है कि प्रयोगात्मक परीक्षाओं के आयोजन को लेकर हर्रावाला विश्वविद्यालय से वार्ता चल रही है। जल्द ही इस विषय का सकारात्मक निराकरण निकाल लिया जाएगा और सभी छात्र-छात्राओं की प्रयोगात्मक परीक्षाएं सुचारू रूप से संपन्न कराई जाएंगी।
उत्तरकाशी: जनपद के खट्टुखाल मोटर मार्ग पर गुलदार (बाघ) का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार शाम गुलदार ने बाइक सवार दो युवकों पर अचानक झपट्टा मार दिया, जिसमें दोनों बाल-बाल बच गए लेकिन गिरकर घायल हो गए। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत के साथ-साथ वन विभाग के खिलाफ गहरा आक्रोश फैल गया है। सड़क पर अचानक झपटा गुलदार
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (DEOC) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 14 सितंबर की शाम लगभग 7:00 बजे की है। संदीप सिंह और दीपक सिंह बाइक से अपने घर लौट रहे थे। खट्टुखाल मार्ग पर घात लगाए बैठे गुलदार ने अचानक उनकी बाइक पर हमला बोल दिया। हमले के कारण बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई और दोनों युवक सड़क पर गिर पड़े, जिससे उनके घुटनों में चोटें आईं। सूचना पर पहुंची डुंडा अनुभाग की टीम ने 108 एम्बुलेंस से घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका उपचार चल रहा है। दोनों फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
पहले भी हो चुका है हमला, खौफ के साए में ग्रामीण इलाके में गुलदार के हमले की यह पहली घटना नहीं है। इससे पूर्व भी खेत में काम कर रही एक मां और उसकी बेटी पर गुलदार द्वारा हमला किया जा चुका है। आए दिन हो रही इन घटनाओं से स्थानीय लोग खेतों और रास्तों पर निकलने से कतराने लगे हैं।
प्रशासन की ढिलाई पर फूटा गुस्सा लगातार हो रहे हमलों के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दो-टूक कहना है कि केवल गश्त बढ़ाने या खानापूर्ति के लिए पिंजरा लगाने भर से समस्या का समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने आक्रोश जताते हुए पूछा कि क्या वन विभाग किसी बड़ी अनहोनी घटना का इंतजार कर रहा है? स्थानीय लोगों ने आदमखोर होते वन्यजीव से तुरंत निजात दिलाने और पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने की मांग की है।
ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग): तहसील मुख्यालय ऊखीमठ में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों एवं क्षेत्रवासियों ने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो वे भूख हड़ताल पर बैठने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदर्शनकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान केदारनाथ और द्वितीय केदार मदमहेश्वर की शीतकालीन गद्दीस्थल होने के कारण इस क्षेत्र में साल भर लाखों श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद तीन मंजिला बना यह अस्पताल महज नाममात्र का बनकर रह गया है। अस्पताल में एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी मूलभूत जांच सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उचित इलाज के अभाव में कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं, वहीं आपदा की स्थितियों में मरीजों का उपचार इंटर कॉलेज में कराया जाता है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि विधानसभा उपचुनाव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री द्वारा स्वास्थ्य केंद्र के उच्चीकरण और सुविधाओं को लेकर की गई घोषणाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।
धरने के पहले दिन व्यापार संघ अध्यक्ष राजीव भट्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कुब्जा धर्मवान, पूर्व सभासद बलवंत रावत, ऊखीमठ सरपंच पवन राणा, महिला मंगल दल अध्यक्ष आरती शैव, ओंकारेश्वर वार्ड सभासद प्रदीप धर्मवान, पूर्व छात्र संघ नेता विराट भट्ट समेत कई स्थानीय युवा, मातृशक्ति और बुजुर्ग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने दो-टूक कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों और आधुनिक सुविधाओं की तैनाती तक आंदोलन जारी रहेगा।
उत्तरकाशी: जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने वाले डिजिटल मंच ‘उत्तरदीप टुडे न्यूज़ उत्तराखंड’ पर खबर प्रकाशित होने के मात्र दो दिन के भीतर कार्यदायी संस्था एक्शन मोड में आ गई है। ढूंड्डा-सिंघुटी से लेकर देवीधार तक सड़क किनारे फैली घनी झाड़ियों और चोक नालियों की सफाई का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, इस मार्ग के निर्माण व प्रबंधन से जुड़ी ‘भारत कंपनी’ ने अपने पार्टनर ‘स्टोन फील्ड’ को यह काम सौंपा था, जिसने आगे चलकर सड़क के रख-रखाव (मेंटेनेंस) का जिम्मा ‘चौधरी कंस्ट्रक्शन लिमिटेड, मेरठ’ को दिया है
सड़क किनारे घनी झाड़ियों के कारण विजिबिलिटी शून्य हो रही थी और नालियां मलबे से पटी थीं, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा बना हुआ था। उत्तरदीप टुडे न्यूज़ पर खबर प्रसारित होते ही संबंधित एजेंसी ने तुरंत मजदूर और मशीनरी लगाकर काम शुरू कराया।
मार्ग के दोनों किनारों से झाड़ियों की कटाई की जा रही है तथा नालियों से भारी मात्रा में सिल्ट व मलबा निकालकर जल निकासी सुचारू की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों ने खबर का त्वरित असर होने और कार्य शुरू होने पर ‘उत्तरदीप टुडे न्यूज़’ का आभार व्यक्त किया है। साथ ही मांग की है कि नालियों से निकले मलबे को जल्द से जल्द सड़क किनारे से हटाया जाए ताकि वाहनों की आवाजाही में कोई रुकावट न हो।
गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र स्थित 5,819 मीटर (लगभग 19,091 फीट) ऊंचे रुद्रगैरा शिखर पर शिवा एडवेंचर ट्रेक एंड टूर (सैट एक्सपेड्स) के पर्वतारोहण दल ने फतह हासिल की है। 9 सितंबर को पूरे हुए इस अभियान के साथ ही दल ने वर्षा ऋतु के बाद इस चोटी पर सीजन का प्रथम सफल आरोहण दर्ज कराया। इस दल में तेलंगाना और गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों के पर्वतारोही शामिल रहे।
👇🏾गंगोत्री से शुरू हुआ था सफर👇🏾 अभियान की शुरुआत 4 सितंबर को गंगोत्री धाम से हुई थी। दल पहले चरण में नाला कैंप पहुंचा और अगले दिन कठिन चढ़ाई पार कर रुद्रगैरा आधार शिविर (बेस कैंप) में डेरा डाला। आधार शिविर में तकनीकी तैयारियों और मौसम के मिजाज को भांपने के बाद पर्वतारोहियों ने मुख्य चोटी की ओर कदम बढ़ाए।
👇🏾‘व्हाइट आउट’ ने ली कड़ी परीक्षा👇🏾 चोटी के समीप पहुंचते ही दल की राह में मौसम सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ा हो गया। सुबह मौसम पूरी तरह साफ था, लेकिन ऊंचाई पर पहुंचते ही घाटी घने कोहरे और बर्फबारी की चपेट में आ गई। ‘व्हाइट आउट’ की स्थिति बनने से दृश्यता शून्य के करीब पहुंच गई। शिखर से महज 100 से 200 मीटर की दूरी पर टीम ने अत्यधिक सतर्कता बरती। पर्वतारोही संदीप, पीटर और अन्य साथियों ने सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आपसी तालमेल और बैकअप के जरिए इस दुर्गम चुनौती को पार किया।
👇🏾 पर्वतारोही महिपाल रेड्डी (तेलंगाना) ने बताया:👇🏾 > “हमने गंगोत्री से पैदल यात्रा शुरू कर नाला कैंप और बेस कैंप का कठिन सफर तय किया। चोटी के ठीक नीचे अचानक मौसम बिगड़ने और भारी व्हाइट आउट के बावजूद टीम ने धैर्य नहीं खोया। सटीक रणनीति और आपसी सहयोग के बल पर ही हम 5,819 मीटर ऊंचे रुद्रगैरा पर सुरक्षित और सफल चढ़ाई पूरी कर सके।”
रुद्रगैरा अपनी सीधी ढलानों, हिमनदों और अप्रत्याशित मौसम के लिए तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मानसून के तुरंत बाद मिली इस कामयाबी से उत्तरकाशी के गंगोत्री क्षेत्र में साहसिक पर्यटन और उच्च-हिमालयी अभियानों को नया संबल मिलेगा।
उत्तरकाशी: सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों पारंपरिक ‘थोलू’ (स्थानीय मेलों) का उल्लास चरम पर है। जनपद के विभिन्न गांवों में आयोजित हो रहे इन पारंपरिक मेलों में लोक संस्कृति, आस्था और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। ढोल-दमाऊ और रणसिंगे की गूंज के बीच ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर देव डोलियों के दर्शन और मेलों के आनंद के लिए उमड़ रहे हैं।
👇🏾देव डोलियों के आगमन से भक्तिमय हुआ माहौल👇🏾 गांवों में आयोजित थोलू के अवसर पर स्थानीय आराध्य देवी-देवताओं के पश्वा अवतरित हुए और भव्य देव डोलियों ने ग्रामीणों को आशीर्वाद दिया। देव निशानों और डोलियों के प्रांगण में पहुंचते ही पूरा वातावरण “जय जयकार” के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक भेंट, अक्षत और पुष्प अर्पित कर क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
👇🏾रासों और तांदी नृत्य का आकर्षण👇🏾
थोलू का मुख्य आकर्षण पारंपरिक लोकनृत्य रहे। पुरुषों और महिलाओं ने एक-दूसरे का हाथ थामकर गोल घेरे में पारंपरिक ‘रासों’ और ‘तांदी’ नृत्यों की प्रस्तुति दी। ढोल-दमाऊ की थाप पर देर शाम तक लोकगीतों और नृत्यों का दौर चलता रहा, जिसमें बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
👇🏾बाजारों में रौनक, दूर-दराज से पहुंचे प्रवासी👇🏾 मेलों के चलते गांव के चौपालों और खुले मैदानों में सजी दुकानों पर भी खासी भीड़ रही। बच्चों ने खिलौनों और झूलों का आनंद लिया, वहीं महिलाओं ने घरेलू सामान और पारंपरिक मिठाइयों की खरीदारी की।
विशेष बात यह रही कि थोलू के पावन अवसर पर रोजगार और शिक्षा के सिलसिले में बाहर रह रहे प्रवासी ग्रामीण भी अपने पैतृक गांव पहुंचे, जिससे गांवों में उत्सव का माहौल दोगुना हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि सदियों पुराने ये थोलू मेले केवल उत्सव का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह हमारी समृद्ध पहाड़ी विरासत, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को जीवित रखने का सबसे सशक्त आधार हैं।
उत्तरकाशी: करोड़ों की लागत से बनी ऑल वेदर रोड पर अब सफर कम और ‘सफारी’ का अहसास ज्यादा हो रहा है! देवीधार से लेकर सिंगोटी तक की सड़क इन दिनों विभागीय लापरवाही और कार्यदायी संस्था की सुस्ती का जीता-जागता नमूना बन चुकी है। सड़क किनारे उगी घनी झाड़ियां, बिखरा कबाड़ और पड़े बोल्डर चीख-चीख कर कह रहे हैं कि मेंटेनेंस के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
👇🏾कागजों में चमचमाती सड़क, ज़मीन पर उफनती नालियां👇🏾 पूर्व में ऑल वेदर परियोजना के तहत सीमा सड़क संगठन (BRO) ने पेंटिंग, सुरक्षा दीवार और नालियों के निर्माण का जिम्मा भारत कंपनी को दिया था, जिसका काम उसकी सह-कंपनी ‘स्टोन फील्ड’ ने पूरा किया। अनुबंध के मुताबिक सड़क बनने के बाद उसके रखरखाव (Maintenance) की पूरी जिम्मेदारी भी स्टोन फील्ड कंपनी की ही थी।
सड़क बने 5 साल बीत चुके हैं और कंपनी के अनुबंध का अब महज 1 साल बाकी रह गया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि: 👉🏾नालियां चोक, घरों में सैलाब: नालियों की सफाई न होने से बारिश का गंदा पानी सड़कों पर बहते हुए सीधे स्थानीय बाजारों और लोगों के घरों में घुस रहा है।
👉🏾अदृश्य होते मोड़: दोनों तरफ फैली झाड़ियों के कारण तीखे मोड़ों पर सामने से आते वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे हर वक्त बड़े हादसों का खतरा बना रहता है।
👉🏾 काम ज़ीरो, फोटो हीरो: स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी केवल ‘फोटो खिंचवाने’ आते हैं। चंद तस्वीरें खींचकर उच्चाधिकारियों को भेज दी जाती हैं और काम पूरा मान लिया जाता है। जनता का सवाल— आखरी साल में भी नहीं जागेगा प्रशासन? जब अनुबंध में मेंटेनेंस शामिल है, तो फिर जनता इस बदहाली को झेलने पर क्यों मजबूर है? अनुबंध खत्म होने में सिर्फ एक साल बचा है, ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कंपनी सिर्फ औपचारिकता पूरी कर निकल जाएगी? स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने BRO और प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर नालियों की सफाई व झाड़ियों के कटान की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले व्यवस्था पटरी पर आ सके।
उत्तरकाशी: भटवाड़ी विकासखंड क्षेत्र में 55 से अधिक ग्रामीणों के नाम पर बैंक ऋण लेकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बैंक से भारी-भरकम रिकवरी नोटिस मिलने के बाद परेशान और आक्रोशित ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी से मिलीं और निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
पीड़ितों का कहना है कि उन्हें बिना जानकारी दिए अथवा योजनाओं के नाम पर झांसा देकर उनके दस्तावेजों के आधार पर उत्तरकाशी जिला सहकारी बैंक से लाखों रुपये के लोन (जैसे मौन पालन/बी-कीपिंग आदि) स्वीकृत करवा लिए गए। अब जब बैंक द्वारा बकाया वसूली के नोटिस और एनपीए (NPA) होने की चेतावनी घर पहुंच रही है, तब ग्रामीणों को इस बड़े फर्जीवाड़े का पता चला।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने और गरीब परिवारों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना से राहत दिलाने की गुहार लगाई है। प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच का भरोसा दिलाया है।