उत्तराखंड की सियासी बिसात पर यमुनोत्री विधानसभा सीट एक बार फिर सबसे गर्म अखाड़ा बनती नजर आ रही है। चुनावी सुगबुगाहट तेज होते ही क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर इस बार यमुनोत्री की नैया किसके सहारे पार होगी। एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर टिकट को लेकर जबरदस्त खींचतान और दावेदारी देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में पूरी स्थिति पर पैनी नजर गड़ाए हुए है।


   👇BJP के खेमे में कांटे की टक्कर👇
यमुनोत्री में इस वक्त भाजपा का टिकट पाने के लिए तीन कद्दावर चेहरे पूरी ताकत झोंक रहे हैं:

केदार सिंह 👆


👉केदार सिंह रावत👉 पूर्व विधायक और यमुनोत्री की राजनीति के पुराने खिलाड़ी, जिनका अपना एक मजबूत कैडर और पुराना राजनीतिक रसूख है।
👉 मनवीर सिंह चौहान👉 संगठन में मजबूत पकड़ और प्रदेश स्तर पर पार्टी का बड़ा चेहरा, जिनकी पैरवी शीर्ष नेतृत्व तक मानी जाती है।

👆मनवीर सिंह 👆


👉दीपक बिजल्वाण 👉युवाओं के बीच सक्रिय, आक्रामक तेवर और स्थानीय स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ के दम पर टिकट की रेस में ताल ठोकते हुए।
पार्टी के सामने सबसे बड़ा सिरदर्द यह है कि इनमें से किसी एक पर दांव लगाने का मतलब बाकी दो गुटों की नाराजगी का जोखिम उठाना हो सकता है।

👆दीपक बिज्लवाण👆


👇संजय डोभाल की चुप्पी ने बढ़ाई सबकी धड़कनें👇
मौजूदा विधायक संजय डोभाल ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। निर्दलीय जीतकर विधानसभा पहुंचे डोभाल की चुप्पी ने राजनीतिक पंडितों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उनका अगला कदम क्या होगा? क्या वे दोबारा निर्दलीय ताल ठोकेंगे या फिर किसी बड़े दल के साथ सियासी समीकरण साधेंगे? उनकी यह ‘रहस्यमयी चुप्पी’ भाजपा और कांग्रेस दोनों के खेमों में हलचल पैदा किए हुए है।

👆संजय डोभाल 👆


👉कांग्रेस की नजर मे क्या बागी बनेंगे मुख्य हथियार?👇
इधर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस शांत रहकर भाजपा के इस अंतर्कलह को भुनाने की फिराक में है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी जोरदार चर्चा है कि भाजपा में टिकट वितरण के बाद बगावत के सुर उठना तय है। ऐसे में क्या कांग्रेस किसी असंतुष्ट या बागी चेहरे पर दांव खेलकर अपनी चुनावी नैया पार लगाने की तैयारी कर रही है?
कुल मिलाकर, यमुनोत्री का सियासी पारा चरम पर है। भाजपा का हाईकमान किसे चुनावी रण में उतारता है, मौजूदा विधायक क्या फैसला लेते हैं और कांग्रेस किस रणनीति से वार करती है—इसी त्रिकोण पर तय होगा कि यमुनोत्री का ताज किसके सिर सजेगा।

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