
उत्तरकाशी। एक तरफ जहां विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं जनपद का एक ऐसा गांव भी है जो पिछले 18 वर्षों से अपनी सड़क पर डामर की एक परत तक बिछने का इंतजार कर रहा है। शासन-प्रशासन की लगातार अनदेखी से त्रस्त आकर ग्राम पंचायत ओल्या के ग्रामीणों ने अब लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे कड़ा कदम उठाने का मन बना लिया है—”सड़क नहीं तो वोट नहीं”।

ग्राम प्रधान एवं उपाध्यक्ष प्रधान संगठन उत्तरकाशी, श्रीमती रेखा भट्ट की अध्यक्षता में आयोजित खुली बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर साफ चेतावनी दी गई कि यदि लंबित मोटरमार्गों पर तुरंत ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी विधानसभा चुनाव में पूरा गांव मतदान का पूर्ण बहिष्कार करेगा।
👇18 साल से बदहाल, गड्ढों में तब्दील ‘जीवनरेखा’👇
👉स्यालना–कल्याणी मोटरमार्ग: डांग से ओल्या होते हुए मसून तक जाने वाले इस मुख्य मार्ग पर 18 साल से डामरीकरण नहीं हुआ है। मार्ग पूरी तरह खस्ताहाल है, जिससे आए दिन हादसों का डर बना रहता है।
👉 मरीजों और छात्रों पर मार: जर्जर सड़क के कारण आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल ले जाना चुनौती बन चुका है। स्कूली बच्चे, महिलाएं और किसान रोज़ाना जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
👉फाइलों में दबी परियोजनाएं: ओल्या–बल्ला मोटरमार्ग के द्वितीय चरण की स्वीकृति लंबे समय से अटकी है, जबकि जखारी–बल्ला मोटरमार्ग की मांग पर भी कोई सुध नहीं ली जा रही।


👇आश्वासन नहीं, धरातल पर काम चाहिए: प्रधान रेखा भट्ट👇
ग्राम प्रधान रेखा भट्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सड़क गांव के विकास की बुनियादी जरूरत है। किसान अपनी उपज मंडी तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
उन्होंने दो टूक कहा:
> “ग्रामीण अब कोरे आश्वासनों के सहारे नहीं बैठेंगे। मांग पत्र और प्रस्ताव जल्द ही जिलाधिकारी उत्तरकाशी को सौंपा जाएगा। यदि विभागों ने जल्द काम शुरू नहीं कराया, तो गांव में व्यापक धरना-प्रदर्शन होगा और विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा, जिसकी सीधी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह फैसला किसी दल विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने बुनियादी हक और सुरक्षित आवागमन की लड़ाई के लिए है।

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