वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच देश-विदेश के हजारों श्रद्धालुओं ने मां भागीरथी के शीतल जल में लगाई पावन डुबकी, कमाया पुण्य लाभ।

पतितपावनी और मोक्षदायिनी मां भागीरथी (गंगा) के धरा अवतरण के पावन पर्व ‘गंगा दशहरा’ पर आज गंगोत्री धाम में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का एक अलौकिक समागम देखने को मिला। कपाट खुलने के बाद से ही धाम में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था, लेकिन आज गंगा दशहरा के विशेष अवसर पर सुबह से ही पूरा मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया।


सुबह की पहली किरण के साथ ही सुप्रसिद्ध गंगोत्री धाम मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और ‘हर-हर गंगे, जय मां गंगे’ के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। मुख्य मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और मां गंगा के अभिषेक के बाद घाटों पर स्नान का सिलसिला शुरू हुआ।
कड़कती ठंड में भी अटूट आस्था


देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने भागीरथी के पवित्र और बर्फ जैसे शीतल जल की परवाह किए बिना आस्था की डुबकी लगाई। तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में भक्तों ने घाटों पर तर्पण और दान-पुण्य कर सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि आज ही के दिन राजा भगीरथ की सदियों की तपस्या के बाद मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, इसलिए आज के दिन गंगा स्नान का विशेष आध्यात्मिक महत्व है।

सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा व सुविधा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर जल पुलिस की तैनाती के साथ-साथ कतारबद्ध तरीके से दर्शन और स्नान की व्यवस्था की गई थी, जिससे सुदूर क्षेत्रों से आए तीर्थयात्रियों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। देर शाम होने वाली भव्य गंगा आरती के लिए भी धाम को विशेष रूप से फूलों और रोशनी से सजाया गया

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