158 सीसीटीवी कैमरों से होगी यात्रा मार्गों की लाइव मॉनिटरिंग
जिला मुख्यालय उत्तरकाशी में चारधाम यात्रा 2025 के सफल सुरक्षित एंव व्यवस्थित संचालन हेतु स्मार्ट कंट्रोल रूम की स्थापना की गई। कंट्रोल रूम आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सुसज्जित है।
कंट्रोल रूम के माध्यम दोनों धामों के प्रमुख स्थलों पर लगाए गए 58 सीसीटीवी कैमरों के जरिए यात्रा मार्गों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे तीर्थ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने,यातायात व्यवस्था बनाए रखने एवं किसी भी आपात स्थिति का त्वरित समाधान करने में सहायता मिलेगी।
कंट्रोल रूम से यात्रा संबंधी कार्यों का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। स्मार्ट कंट्रोल रूम में कार्मिकों की तैनाती की गई है।
इसके साथ ही पुलिस कंट्रोल रूम द्वारा भी 100 सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से विभिन्न संवेदनशील स्थलों की निगरानी की जा रही है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनी हुई है।
चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थ यात्रियों की सुविधा,सुरक्षा एवं समयबद्ध समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
कल अक्षय तृतीय के शुभ मुहूर्त पर 10बजकर 30 मिनट पर,खुलेंगे गंगोत्री के कपाट
मां गंगा की उत्सव डोली आज मुखवा (मुखीमठ) से सुरक्षा व्यवस्था के बीच डोल-नगाड़ों व आर्मी बैंड की धुन में हजारों श्रद्धालुओं के साथ “हर-हर गंगे, जय माँ गंगे” के जयकारों के साथ गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान कर चुकी है।
मां गंगा का रात्रि विश्राम आज भैरवघाटी स्थित भैरव मंदिर में होगा, कल प्रातः मां गंगा जी की उत्सव डोली भैरव मंदिर से गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेंगी।
कल अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर ठीक 10 बजकर 30 मिनट पर गगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल जायेंगे।
स्पन्दन बडेथी में पोषण पखवाडा मनाया गया।जिसमे गर्भवती/धात्री महिलाओं एवं ग्रामीणो को पोषण से सम्बंधित जानकारी दी गई।और विभागीय योजनाओं की जानकारी जैसे – मातृ वन्दना, नन्दा गौरा जन्मी बालिका,इन्टर पास बालिका, मुख्यमंत्री महालक्ष्मी किट की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यकत्री श्रीमती प्रीति शाह के द्धारा गोदभराई, अन्नप्राशन, वजन एवं लम्बाई, कुपोषित/अतिकुपोषित की जानकारी व मोटे अनाजों से बनने वाले भोजन के बारे में बताया गया।साथ ही उन्होंने आने वाले मौसम परिवर्तन से होने वाली बीमारी एवं मक्खी मच्छर से बचने हेतु सावधानी बरतने की भी सलाह दी ।
वार्ड सदस्य श्रीमती मधुदेवी ने उक्त पोषण पखवाडा की प्रसंशा करते हुए आमजन से विभागीय योजनाओं की जानकारी के साथ साथ लाभ लेने हेतु कहा।
इस दौरान महिला मंगल दल की अध्यक्षा श्रीमती नीतू एवं माता समिति की अध्यक्षा श्रीमती योगिता के द्वारा लाभार्थी श्रीमती योगिता नौटियाल पत्नी अमित नौटियाल की गोदभराई की रस्म कि गई। कार्यक्रम मे रुपा ,ईशा ,रोजी , आराधना , विजयलक्ष्मी ,पूजा , बसन्ती , जमना , सरिता ,मीना , शिवकुमारी ,हुकमा , सुलोचना , गीता , प्रीति आदि उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन ने यात्रा को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने हेतु व्यापक प्रबंध किए है। चारधाम यात्रा को सुगम,सुरक्षित और सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक तैयारियाँ पूर्ण कर ली है।यमनोत्रीधाम श्रद्धालुओ/यात्रियों के स्वागत हेतु पूरी तरह तैयार।
जिलाधिकारी डॉ.मेहरबान सिंह बिष्ट ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम व सुरक्षित सम्पन्न कराने के लिए प्रशासन प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यमुनोत्री धाम के साथ ही प्रमुख यात्रा पड़ाव पर सभी मूलभूत सुविधाओं को चाक-चौबंद किया गया है।
जिलाधिकारी ने कहा जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक पैदल मार्ग को दुरुस्त किया गया है। यात्रियों को धूप और बारिश से बचाव हेतु मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शैल्टर (आश्रय स्थल) बनाए गए है। पैदल मार्ग पर यात्रियों के विश्राम हेतु बैठने के लिए बेंचों की व्यवस्था की गई है। पैदल मार्ग पर यात्रियों शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
उन्होंने कहा कि धाम पर स्नान घाट को सुव्यवस्थित कर आवागमन को आसान बनाया गया है। भीड़ नियंत्रण को लेकर धाम में एकतरफा (वनवे) सिस्टम लागू किया गया है। हैलीपैड का निर्माण कर आपातकालीन व्यवस्था को मजबूत किया गया है। हैलीपैड से धाम तक पैदल मार्ग का निर्माण किया गया।
सभी अल्पकालिक कार्यों को यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व पूरा कर लिया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छता,शौचालय,घोड़ा पड़ाव,प्रीपेड काउंटर जैसे व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया है।
चारधाम यात्रा के दौरान यातायात दबाव एवं ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने हेतु इस बार श्री गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम यात्रा रुट पर पुलिस मोबाइल बाइक गस्त करती नजर आएंगी।
चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात दबाव, संवेदनशील तथा नैरो पैचेज पर व्यवस्थित यातायात एवं किसी भी अप्रिय घटना में त्वरित प्रतिवादन हेतु जिलाधिकारी उत्तरकाशी के सौजन्य से उत्तरकाशी पुलिस को 10 मोटरसाइकिल प्राप्त हुयी हैं, जो गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग के दुर्घटना प्रभावी तथा संकरे मार्गों पर लगातार गस्त करेंगी। उक्त मोटरसाइकिलों को जिलाधिकारी उत्तरकाशी एवं पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी द्वारा रिबन काटकर रवाना किया गया।
पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी द्वारा बताया गया कि जिलाधिकारी के माध्यम से उत्तरकाशी पुलिस को आवंटित की गयी उक्त मो0सा0 यात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था को बनाने काफी मददगार साबित होंगी, यह मो0सा0 दुर्घटना प्रभावी/संकरे मार्ग गंगनानी से डबरानी, डबरानी से सुक्की, झाला से हर्षिल, धराली से बैरोघाटी, सिलक्यारा से राड़ी टॉप, राड़ी टॉप से औरछा, बडकोट दोबाटा, पालीगाड़ से स्यानाचट्टी, स्याना से रानाचट्टी, रानाचट्टी से हनुमान चट्टी तथा हनुमान चट्टी से जानकीचट्टी, खरसाली तक लगातार गस्त पर रहेंगी।
श्रद्धालुओं की सहायता हेतु उत्तरकाशी पुलिस ने किया एक क्यूआर कोड तैयार
चारधाम यात्रा 2025 के सरल, सुगम एवं सुरक्षित संचालन के क्रम में पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी श्रीमती सरिता डोबाल के नेतृत्व में उत्तरकाशी पुलिस इस बार श्रद्धालुओं की सहायता हेतु एक नई पहल शुरु की गयी है, जिसमें पुलिस द्वारा एक क्यूआर कोड तैयार किया गया है।
जिससे यात्रा के दौरान विभिन्न प्रान्तों से आए तीर्थयात्री/श्रद्धालुओं को क्यूआर स्कैन करते ही श्री गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम यात्रा रुट व पडावों की जानकारी के साथ-साथ पार्किंग, होटल/ढाबे, पैट्रोल पम्प, डायवर्जन प्वाइंट, लैण्ड स्लाईड जोन, पुलिस सहायता केन्द्र, एटीएम, पर्यटक स्थल, महत्वपूर्ण दूरभाष आदि की जानकारी मिल सकेगी। यह क्यूआर यात्रा को और अधिक सुगम व सरल बनाने मददगार साबित होगा साथ ही श्रद्धालुओं के लिए पथ प्रदर्शक का काम करेगा। उत्तरकाशी पुलिस यात्रा रुट के मुख्य-मुख्य पडावों पर क्यूआर कोड को लगाया गया है। श्री यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम यात्रा पर उत्तरकाशी पुलिस सभी श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन करती है, हम आपकी सुखद यात्रा के लिए तत्पर हैं।
जिलाधिकारी ने बीआरओ को 28अप्रैल तक दोनों पैच के मलवा हटाने का दिया निर्देश
जिलाधिकारी डॉ.मेहरबान सिंह बिष्ट ने शनिवार को गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के रतूड़ी सेरा व बन्दरकोट भूस्खलन क्षेत्र के पहाड़ी पर चल रहे दीर्घकालिक व अल्पकालिक उपचारात्मक कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर जायजा लिया।
तथा अधिकारियों को जरूरी दिशा- निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने चारधाम यात्रा को देखते हुए सीमा सड़क संगठन को 28 अप्रैल तक दोनों पैच पर सड़क के किनारे पड़े मलबा व बोल्डर को हटाने के निर्देश देते हुए सड़क को समतलीकरण करके वाहनों के निर्बाध आवागमन के लिए दो-लाइन बनाने को कहा। जिलाधिकारी ने कहा कि आगामी 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हो जाएगी।
और मई व जून के महीनों में यात्रा का अधिकतम प्रभाव देखा जाएगा,ऐसे में यात्रा के दौरान सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी। इस हेतु जिलाधिकारी ने बीआरओ को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
एम्स, ऋषिकेश के अनुभवी चिकित्सकों के अथक प्रयास से मरीज को मिला नवजीवन
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए उत्तराखंड में पहली बार कस्टमाइज्ड 3D प्रिंटेड इम्प्लांट की मदद से जटिल “रिवीजन टोटल हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी” को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस तकनीक के ज़रिए वर्षों से दर्द और असहाय जैसी स्थिति से जूझ रहे मरीज को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिला है। हरिद्वार निवासी 60 वर्षीय संदीप शर्मा, जो कि एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस से ग्रसित रोगी हैं। उन्होंने वर्ष 2003 में पीजीआई चंडीगढ़ में अपने दोनों कुल्हों (hips) का प्रत्यारोपण कराया था। लगभग 20 वर्ष के बाद उनके इम्प्लांट्स फेल हो गए, जिसके चलते वर्ष 2023 से वह असहनीय दर्द के कारण चलने फिरने से बेहद लाचार स्थिति में थे, लिहाजा उनकी दिनचर्या पूरी तरह से व्हीलचेयर पर आश्रित हो गई थी।
बकौल, संदीप शर्मा उन्होंने अपने उपचार के लिए गतवर्ष 2024 में एम्स AIIMS, दिल्ली में उपचार हेतु परामर्श लिया, जहां सर्जरी की प्रक्रिया शुरू की गई। मगर संक्रमण के चलते सर्जरी अधूरी रह गई और चिकित्सकों ने अस्थायी समाधान के तौर पर एक सीमेंट स्पेसर और स्टेबलाइजिंग नेल का उपयोग किया। पेशेंट ने बताया कि वह लंबे समय तक सर्जरी की प्रतीक्षा करने में असमर्थ थे, लिहाजा उन्होंने AIIMS, ऋषिकेश के चिकित्सकों से परामर्श के लिए संपर्क किया।
यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा तमाम जरूरी जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उनके कुल्हे की हड्डी में एक बहुत बड़ा दोष (बोनी डिफेक्ट) है, जिसे सामान्य इम्प्लांट्स से ठीक कर पाना संभव नहीं था। ऐसे में मरीज के लिए विशेषरूप से डिजाइन किया गया 3D प्रिंटेड कस्टमाइज्ड इम्प्लांट तैयार कराया गया।
बीते फरवरी माह के अंतिम सप्ताह में प्रोफेसर रूप भूषण कालिया के मार्गदर्शन में ऑर्थोपेडिक्स विभाग की टीम द्वारा 8 घंटे में यह जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। डॉ. रूप भूषण कालिया के अनुसार इस प्रक्रिया में पहले से डाले गए सीमेंट स्पेसर और नेल को हटाकर 3D प्रिंटेड कस्टम इम्प्लांट को प्रत्यारोपित किया गया। राज्य में हुई यह अपनी तरह की पहली जटिल सर्जरी के लिए सहयोगी एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. भावना गुप्ता ने किया। सर्जरी के 7 सप्ताह बाद अब पेशेंट संदीप शर्मा पूरी तरह वजन सहन करने की स्थिति में हैं और उन्होंने सामान्यरूप से चलना प्रारंभ कर दिया है।
लंबे अरसे से शारीरिक पीड़ा का सामना कर चुके पेशेंट से रोज-रोज के दर्द से स्थायीतौर पर निजात मिलने पर अपनी खुशी व्यक्त करते हुए बताया कि “मैं 2023 से काफी दर्द में था और पूरी तरह से व्हीलचेयर पर निर्भर हो गया था। एम्स, ऋषिकेश में मुझे बहुत ही बेहतर इलाज और देखभाल मिली है। चिकित्सकों ने बेहद संवेदनशीलता और मेहनत से मेरा समुचित उपचार किया। मैं संपूर्ण चिकित्सकीय टीम के प्रति आभार व्यक्त करता हूं और मुझे प्रसन्नता है कि मैं एम्स के डॉक्टरों के शल्य चिकित्सा कौशल से एक बार फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सका।” यह उपलब्धि चिकित्सा जगत में 3D प्रिंटिंग तकनीक की प्रभावशीलता और संभावनाओं को उजागर करती है, जो विशेषकर जटिल और चुनौतीपूर्ण मामलों में मरीजों के लिए जीवन बदलने वाला समाधान सिद्ध हो सकती है।
25 व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस एक्ट में की कार्रवाई
चारधाम यात्रा 2025 के दृष्टिगत यातायात व्यवस्था को सुगम एवं सुरक्षित बनाने हेतु पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी के निर्देशन मे प्रभारी निरीक्षक कोतवाली उत्तरकाशी श्रीमती भावना कैंथोला के नेतृत्व में कोतवाली पुलिस टीम द्वारा अलग-अलग टीम बनाकर उत्तरकाशी बाजार क्षेत्र में दुकानदारों द्वारा सडक किनारे अवैध अतिक्रमण व रेडी- ठेली वालों के विरुद्ध चैकिंग अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान पुलिस द्वारा सड़क किनारे अनावश्यक अतिक्रमण करने वाले 25 व्यक्तियों के विरुद्ध पुलिस एक्ट में चालानी कार्रवाई की गयी।
सभी को अपने दुकानों के सामान को अनावश्यक रुप से सड़क पर न फैलाने, रेड़ी-ठेली को निर्धिरित स्थानों पर लगाने की सख्त हिदायत दी गयी।
एम्स ऋषिकेश ने ’एसएफए एथेरेक्टोमी’ प्रक्रिया में पायी सफलता – चिकित्सा क्षेत्र में संस्थान की एक और नई उपलब्धि
पैरों में रक्त का प्रवाह कम होने पर अब फीमोरल धमनी (जांघ की सबसे बड़ी रक्त वाहिका) में ब्लाॅकेज की समस्या का एथेरेक्टाॅमी तकनीक से इलाज किया जा सकेगा। एम्स ऋषिकेश के रेडियोलाॅजी विभाग ने हाल ही में इस प्रक्रिया को सफलता पूर्वक संपन्न कर एक नई उपलब्धि हासिल की है। मेडिकल साईंस की यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बाईपास सर्जरी करने से बचा जा सकता है और साथ ही रक्त वाहिका में स्टंट डालने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती है। इस प्रक्रिया से इलाज करने वाला एम्स ऋषिकेश देश के नव स्थापित एम्स संस्थानों में पहला एम्स है।
देश में संवहनी स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश ने अपनी पहली सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी (एसएफए) एथेरेक्टोमी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। संस्थान के डायग्नोस्टिक और इंटरवेंशन रेडियोलॉजी विभाग (डीएसए लैब) ने अप्रैल के पहले सप्ताह में देहरादून निवासी एक 68 वर्षीय रोगी का इस विधि से सफल इलाज कर विशेष उपलब्धि हासिल की है। रोगी के पैरों की नसों में ब्लाॅकेज के कारण उसे चलने-फिरने में दर्द के साथ दिक्कत थी और उसके पैरों का रंग भी काला पड़ गया था। बतादें कि ’फीमोरल धमनी एथेरेक्टोमी’ इलाज की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जांघ की सबसे बड़ी धमनी (फीमोरल धमनी) से प्लाक को हटाया जाता है। यह आमतौर पर तब किया जाता है जब एथेरोस्क्लेरोसिस के कारण धमनी में रुकावट हो जाती है और पैरों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
रेडियोलाॅजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अंजुम बताती हैं कि यह प्रक्रिया परिधीय धमनी रोग (पीएडी) से पीड़ित रोगियों के लिए विशेष फायदेमंद है। इससे उनके इलाज में अब आसानी हो सकेगी। इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और इस प्रक्रिया के ऑपरेटिंग विशेषज्ञ डॉ. उदित चैहान ने बताया कि ’एसएफए एथेरेक्टोमी’ एक न्यूनतम इनवेसिव एंडोवास्कुलर तकनीक है जिसे सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी से एथेरोस्क्लेरोटिक प्लेक को हटाने के लिए डिजाइन किया गया है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया से रोगी के पैरों में रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है और दर्द और अन्य लक्षणों में भी जल्द सुधार होता है। डाॅ0 उदित ने सलाह दी है कि पैरों में ब्लाॅकेज की समस्या वाले रोगी अस्पताल के पांचवें तल पर स्थित डीएसए लैब में आकर इलाज के बारे में उनसे परामर्श ले सकते हैं।
प्रो0मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ने बताया की हमारे चिकित्सकों द्वारा इस प्रक्रिया का सफल निष्पादन करना, उन्नत चिकित्सा तकनीकों को अपनाने और रोगियों को अत्याधुनिक उपचार प्रदान करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। एसएफए एथेरेक्टॉमी की शुरुआत करके एम्स ऋषिकेश ने न केवल अपनी इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी क्षमताओं को बढ़ाया है अपितु अन्य नए एम्स संस्थानों के सम्मुख एक मिसाल भी कायम की है। चिकित्सा देखभाल में नवाचार और उत्कृष्टता के माध्यम से रोगी परिणामों में सुधार के लिए यह उपलब्धि एम्स ऋषिकेश की प्रतिबद्धता साबित करती है।