उत्तरकाशी (ब्यूरो)। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित विश्व प्रसिद्ध दयारा बुग्याल में 17 अगस्त को पारंपरिक ‘अंढूड़ी उत्सव’ (बटर फेस्टिवल) हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया।मखमली घास के मैदानों में आयोजित इस अनूठे लोकपर्व में स्थानीय ग्रामीणों के साथ देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने दूध, दही, मट्ठा और मक्खन की होली खेलकर उत्सव का आनंद लिया।


👇🏾 देव आराधना से शुरुआत👇🏾

परंपरा के अनुसार मां जगदंबा और स्थानीय इष्टदेव सोमेश्वर देवता की विशेष पूजा-अर्चना के बाद 16 अगस्त को देव डोलियों के साथ रैथल, नटीन, बंदराणी और क्यारक गांव के ग्रामीण बुग्याल पहुंचे।
👇🏾रंगों की जगह दुग्ध उत्पादों की होली👇🏾

उत्सव का मुख्य आकर्षण मक्खन होली रही। पशुपालकों और ग्रामीणों द्वारा जुटाए गए मक्खन और छाछ से लोगों ने एक-दूसरे को सराबोर कर लोकपरंपरा का निर्वहन किया।
 

👇🏾लोक संस्कृति का संगम👇🏾

ढोल-दमाऊं की गूंज पर पर्यटकों और ग्रामीणों ने पारंपरिक रासौ व तांदी नृत्य किया, जिससे पूरा बुग्याल पहाड़ी संस्कृति के रंग में रंग गया।
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👇🏾 प्रकृति और पशुधन के प्रति आभार👇🏾यह पर्व केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रकृति और मवेशियों की सुरक्षा एवं समृद्धि के प्रति आभार जताने का सदियों पुराना लोक प्रतीक है।
अध्यक्ष वॉटर फेस्टिवल मेला समिति मनोज राणा ने कहा कि  “अंढूड़ी उत्सव हमारी समृद्ध हिमालयी संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव का महापर्व है। इस बार भी देश-विदेश से पहुंचे मेलार्थियों ने स्थानीय परंपराओं का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।”

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