
मानसून सीजन के दौरान संभावित आपदा और भूस्खलन की चुनौतियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन और सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जनपद के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे सूबे के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों की उच्च स्तरीय बैठक ली। कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तरकाशी आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील जिला है, इसलिए सभी विभाग आपसी समन्वय और पूरी तत्परता से धरातल पर काम करें ताकि जान-माल का नुकसान न के बराबर हो।

कैबिनेट मंत्री ने लोक निर्माण विभाग, एनएच और पीएमजीएसवाई को निर्देश दिए कि बरसात में जिन मार्गों पर लैंडस्लाइड का खतरा सबसे ज्यादा है, उन्हें चिन्हित कर दोनों तरफ जेसीबी और पोकलैंड मशीनें तैनात रखी जाएं।

इसके साथ ही उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सड़क मार्ग से कटने वाले दूरस्थ गांवों के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनिवार्य तैनाती और जीवन रक्षक दवाइयाँ एडवांस में उपलब्ध कराने को कहा। जल संस्थान और विद्युत विभाग को भी आपदा के दौरान पर्याप्त संसाधन रिजर्व रखने के निर्देश दिए गए हैं।
👆बाईट मदन कैशिक👆
👉प्रशासन की तैयारी👉 25 संवेदनशील जोन और 19 हेलीपैड तैयार👇
बैठक में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मानसून पूर्व तैयारियों का ब्योरा देते हुए बताया कि जनपद में कुल 25 संवेदनशील जोन चिन्हित किए गए हैं, जहां सड़कें खोलने के लिए 60 से अधिक मशीनें तैनात हैं। आपातकालीन स्थिति के लिए 68 स्कूलों को शेल्टर होम बनाया गया है। राहत कार्य के लिए एसडीआरएफ की 6 और एनडीआरएफ की 2 टीमें ग्राउंड पर मुस्तैद हैं। इसके अलावा आपातकालीन सेवा के लिए जनपद में 19 सक्रिय हेलीपैड पूरी तरह तैयार हैं और 53 अन्य मैदानों को भी चिन्हित किया

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