शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षण के विभिन्न प्राइवेट माध्यमों के चलते सरकारी शिक्षण संस्थानों की तरफ झूकाव  बहुत कम हुआ है । अब समाज  में धारणा बन चुकी है गरीब या आभाव हिन ही सरकारी तंत्र के भरोसे बैठा है । वही सरकारी कर्मचारी भी कार्यो के प्रति उदासीन बने रहते है । समय समय पर जनता अधिकारियों / नेताओं से शिकायतें भी करती हुए देखी जाती है । लेकिन उत्तरकाशी के डुण्डा विकासखंड के उच्च प्राथमिक विधालय मटटी मे शिक्षक शूरवीर सिहं पडियार के सेवानिवृत्ति पर छात्रों के साथ  अभिभावक भी अपने आँसुओं को रोक नही पा रहे थे ।

सोशियल मीडिया पर वायरल वीडियो में छात्र जोर जोर रोते हुए सुने जा सकते है । शिक्षक शूरवीर पडियार छात्रों को समझाते हुए चुप कराने का बहुत प्रयास कर रहे है ,पर  छात्र फिर भी जोर जोर से रो रहे है और कह रहे है  । गुरु जी आप मत जाओ । शिक्षक पडियार भी छात्रों से  समय समय पर  मिलने  आने की बात कह रहे हैं ।  विधालय में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोहों में बड़ी संख्या मे छात्रों के साथ ग्रामीण भी इकट्ठा हुये थे ।

पैसों की माला व फूलों के हारों से लदकर शिक्षक को सेवानिवृत्ति पर विदाई दे रहे है । छात्र शिक्षक के विधालय से सेवानिवृत्त होकर चले  जाने के दुख में जोर जोर से रोते हुये विदाई देने दूर तक आ रहे है ।  ऐसे दृश्य  आज के वयवसायिक युग मे विलुप्त से हो  रहे है   । ये दृश्य गुरु शिष्य परंपरा के प्रति उम्मीद पैदा करता हुआ दिख रहा है ।  ये भी बतला रहा है शिक्षक का असली सम्मान कोई पदक न होकर छात्रों और अभिभावकों के बीच आत्मीय सम्मान ही असली सम्मान है । ऐसे शिक्षक समाज व शिक्षक समाज के बीच आदर्श रूप  से देखे जायेगे ।समाज के लिए प्रेरणा श्रोत रहेगे ।

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