
शराब के नशे में बढ़ रहे घरेलू विवादों पर आयोग ने जताई चिंता, अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत ने गुरुवार को जिला सभागार में आयोजित ‘महिला जन सुनवाई’ कार्यक्रम में जनपद की महिलाओं की व्यथा सुनी। इस दौरान कुल 8 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से अधिकांश मामले शराब के नशे के कारण होने वाली घरेलू हिंसा से संबंधित थे।
उपाध्यक्ष ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “महिलाओं का किसी भी स्तर पर उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आयोग पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।” जनसुनवाई की खास बात यह रही कि घरेलू हिंसा के दो मामलों में उपाध्यक्ष ने मौके पर ही पति-पत्नी को बुलाकर उनकी काउंसलिंग कराई, ताकि आपसी सहमति से परिवार को टूटने से बचाया जा सके।

नशा मुक्ति और सुरक्षा केंद्र की मांग 👇
कार्यक्रम में महिलाओं ने जिले में बढ़ते नशे पर अंकुश लगाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र, नारी निकेतन और आत्मरक्षा प्रशिक्षण (सेल्फ डिफेंस) केंद्र खोलने की पुरजोर मांग की। उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत ने इन मांगों को जायज ठहराते हुए आश्वस्त किया कि शासन स्तर पर वार्ता कर इन केंद्रों की स्थापना के लिए सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे।

प्रशासन की प्राथमिकता सुरक्षा और सम्मान 👇
जनसुनवाई में उपस्थित जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस और संबंधित विभागों को घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
इस अवसर पर दर्जा राज्य मंत्री प्रताप पंवार, एसपी कमलेश उपाध्याय, एडीएम मुक्ता मिश्र, एसडीएम शालिनी नेगी सहित जिला प्रोबेशन अधिकारी शोएब हुसैन और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

