
उत्तरकाशी विवेक सिंह सजवाण
ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश के नए शोध ने मोटे अनाज (मिलेट) से बने लड्डुओं को युवा महिलाओं के लिए वरदान साबित किया है। इस अध्ययन में पाया गया कि इन लड्डुओं के नियमित सेवन से शरीर में आयरन और कैल्शियम का स्तर काफी बढ़ता है, बिना वजन बढ़ाए। कॉलेज ऑफ नर्सिंग की 100 से अधिक छात्राओं पर हुए इस शोध की अगुवाई प्रो. डॉ. स्मृति अरोड़ा ने की।मिलेट जैसे ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, कंगनी आदि प्रोटीन, फाइबर और खनिजों से भरपूर होते हैं। शोध में हॉस्टल रहने वाली 18-23 साल की नर्सिंग छात्राओं को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को 90 दिनों तक रोज 50 ग्राम मिलेट लड्डू (रागी, भुना चना, गुड़, घी से बने) दिए गए, जबकि दूसरे को सिर्फ रूटीन मेस फूड।शोध के प्रमुख नतीजे:प्रायोगिक समूह में हीमोग्लोबिन, सीरम फेरिटिन (आयरन स्टोर) और सीरम कैल्शियम में उल्लेखनीय वृद्धि।

नियंत्रण समूह में कोई बदलाव नहीं, बल्कि फेरिटिन स्तर कम रहा।दोनों समूहों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) स्थिर रहा।

कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने शोध टीम की तारीफ की, जिसमें डॉ. पूर्वी कुलश्रेष्ठ, डॉ. रंजीता, डॉ. जेवियर वेल्सियाल और फासिया मदाला शामिल थे। प्रो. अरोड़ा ने कहा, “हॉस्टल छात्राओं में अनियमित खान-पान और मासिक धर्म से पोषक तत्वों की कमी आम है। मिलेट लड्डू किफायती और टिकाऊ समाधान हैं।”सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए मायने: यह शोध हॉस्टल मेस, स्कूल भोजन योजनाओं और सामुदायिक कार्यक्रमों में मिलेट स्नैक्स जोड़ने की सिफारिश करता है। उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में स्थानीय मिलेट्स का इस्तेमाल इससे आसान हो जाएगा।

