उत्तरकाशी विवेक सिह सजवाण
एम्स ऋषिकेश की पुष्टि सटीक जांच के बाद ही इलाज शुरू करें,

ऋषिकेश, 12 जनवरी 2026. एनीमिया से पीड़ित हर रोगी को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत नहीं। एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने एक जटिल मामले के इलाज से इसकी पुष्टि की है। यहां ऑटोइम्यून हेमोलिटिक एनीमिया (AIHA) का सटीक निदान कर दवा से मरीज को स्थायी राहत दी गई, बिना रक्त आधान के।एनीमिया में शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से थकान, चक्कर और सांस फूलना जैसी परेशानियां होती हैं। सामान्य कारण आयरन, फोलिक एसिड या विटामिन B12 की कमी हैं, लेकिन हीमोलिटिक प्रकार में लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट होती हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों में खतरा अधिक।मुरादाबाद की 55 वर्षीय महिला का केस
पिछले महीने यूपी के मुरादाबाद से 55 वर्षीय महिला इमरजेंसी में भर्ती हुई। शिकायतें: अत्यधिक कमजोरी, चक्कर, पेट-कमर दर्द, उल्टी और पीलिया। हीमोग्लोबिन मात्र 4.4 gm/dL। पहले 6 महीनों में कई यूनिट खून चढ़ा चुकी थीं, लेकिन फायदा नहीं।जनरल मेडिसिन विभाग ने गहन जांच की।

रक्त परीक्षण से मैक्रोसाइटिक हाइपरप्रोलिफेरेटिव एनीमिया, रेटिकुलोसाइट काउंट 30% और ऊंचा LDH मिला—हेमोलिसिस का संकेत।

इम्यूनो-हेमेटोलॉजिकल जांच से वॉर्म AIHA और फोलेट की कमी पुष्ट।कारण-आधारित इलाज से चमत्कार
रक्त चढ़ाने के बजाय स्टेरॉयड, फोलेट और सपोर्टिव दवाएं दी गईं। नतीजा: हीमोग्लोबिन 4.4 से बढ़कर 8.2 gm/dL, मरीज कुछ दिनों में स्वस्थ। प्रोफ. रविकांत के नेतृत्व में डाॅ. पीके पंडा, डाॅ. दरब सिंह, डाॅ. अक्षिता, डाॅ. गगन दलाल, डाॅ. गीता नेगी, डाॅ. आशीष जैन व डाॅ. दलजीत कौर की टीम ने इलाज किया।”एनीमिया चार प्रकार का होता है, लेकिन हर में खून चढ़ाना जरूरी नहीं।

सटीक पहचान ही सुरक्षित इलाज का आधार है।” — डाॅ. पीके पंडा, जनरल मेडिसिन”AIHA में रक्त आधान से पहले गहन इम्यूनो-हेमेटोलॉजिकल जांच अनिवार्य।” — प्रो. गीता नेगी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन हेडयह मामला कारण-आधारित चिकित्सा के महत्व को रेखांकित करता है। एनीमिया रोगी पहले जांच, फिर इलाज अपनाएं

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