
उत्तरकाशी //विवेक सिहं सजवाण
25 जून1975 , भारत की प्रधानमंत्री स्व ़ इंदिरा गांधी के द्वारा आपातकाल की घोषणा । विपक्षी नेताओं धर पकड होने लगी । जेलों में बंद किया जाये लगा । कुछ लोग भूमिगत हो गये ।देश के बडे नेता राजनारायण , जार्ज फरनाडिज , अटल बिहारी बाजपेयी ,शयामा प्रसाद मुखर्जी, लाल कृष्ण आडवाणी जैसे विपक्षी नेताओं को सरकार ने बंद कर दिया । समाचार पत्रो पर सरकार के विरुद्ध समाचार प्रकाशन पर रोक लग गयी ।

अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लग गयी । सब जगह इंदिरा गुण गया जाने लगा । देश मे जनसंख्या नियंत्रण के लिये नशबंदी कानून लाया । सरकारी कर्मचारी राष्ट्रवयापी नशबंदी अभियान मे लग गया । पूरे देश मे भय व दहशत का माहौल बन गया । जो सरकार की आलोचना करता जेल की सलाखो के पीछे चला जाता ।

देश का प्रबुद्ध वर्ग खुलकर विरोध करने लगा । उत्तराखंड का उत्तरकाशी जनपद भी इस से अछूता नही रहा ।डुडा निवासी तत्कालीन जनसंधी कार्यकता लाखीराम सिहं सजवाण भी आपातकाल के विरोध में कूद पडे । जगह जगह आपातकाल का विरोध करते वैचारिक स्वत्रंत्रता की वकालत करते । तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा आपातकाल थोपे जाने विरोध करते । इसी कडी में 26जनवरी1976 के गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम मे इदिरा सरकार के आपातकाल थोपे जाने की आलोचना व विरोध करने लगे ।

वह उपस्थित राजकर्मचारी उन्होंने रोकने लगे । लेकिन उन्होने अपना विरोध जारी रखा ।बस फिर क्या था सरकारी कर्मचारी ने डुडा चौकी में प्राथमिकी दर्ज करा कर लाखीराम सिंह सजवाण को तहसील के पास गिरफ्तार करवा लिया । गिरफ्तार कर लाखीराम सिहं सजवाण को टिहरी जेल भेज दिया गया । कई माह जेल में बंद रहने के पश्चात आपातकाल समाप्त होने पर व मुकदमे वापस लिए जाने पर ही लाखीराम सिहं सजवाण रिहा हुई । इस सघर्ष के बाद लोकतंत्र और अधिक मजबूत हुआ । देश की प्रेस/मीडिया और सशक्त हुआ । इसके पश्चात उत्तराखंड राज आंदोलन , रामजन्मभूमि आंदोलन , नशाबंदी आंदोलन जैसे अनेकों आंदोलन मे प्रतिभागकर 21अप्रैल2011 को 71 वर्ष की आयु बीमारी के चलते निधन हो गया ।

