उत्तरकाशी //विवेक सिहं सजवाण

पुनः आपके लिए एक अलौकिक शक्ति और आस्था का वर्णन

उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ विकासखंड में स्थित जगदेई स्थल एक दिव्य, और प्राकृतिक महत्व वाला स्थान है। यह स्थल ग्राम सभा इन्द्रा की सीमा में, लगभग 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। चारों ओर घने देवदार वृक्षों से आच्छादित यह स्थल न केवल अपनी भौगोलिक ऊँचाई के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि माता जगदेश्वरी देवी की सिद्धपीठ के रूप में भी इसकी विशेष पहचान है। इस स्थल का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम है, किंतु इसकी सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बना देती है। श्रद्धालु जन यहां वर्षभर हर मौसम में दर्शन हेतु पहुंचते हैं। यहां की जलवायु शुद्ध, वातावरण शांत और दृश्य अत्यंत मनोहारी होते हैं। एक बार जो यहां आता है, वह बार-बार लौटने को विवश हो जाता है।


जगदेई स्थल से आसपास के पर्वतीय दृश्य अत्यंत मनमोहक हैं। जब सूर्य की किरणें देवदारों से छनकर नीचे गिरती हैं, तो मानो प्रकृति स्वयं पूजा-अर्चना कर रही हो। यहां से ठीक सामने कण्डक स्थल दिखाई देता है, जिसकी नजरी दूरी लगभग 1000 मीटर है और पैदल मार्ग से यह दूरी लगभग 4 किलोमीटर है।


जगदेई स्थल बड़ेथी से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ पहुँचने का रास्ता पर्वतीय लेकिन अत्यंत रोमांचक है। यात्रा के दौरान पहाड़ी नज़ारे, पक्षियों की मधुर ध्वनि, और ताजी हवा मन को एक अनोखा सुकून प्रदान करती है।



यह स्थल धार्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध है।

हर वर्ष 5 जून गंगा दशहरा को यहां एक विशाल मेला आयोजित होता है, जिसमें स्थानीय लोग एवं दूर-दराज से आए श्रद्धालु भारी संख्या में भाग लेते हैं। यह मेला न केवल भक्ति भावना को प्रकट करता है, बल्कि पहाड़ी संस्कृति, लोक संगीत, और पारंपरिक मेल-मिलाप का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है।


“जहाँ प्रकृति और पूजा का मेल हो, वो माँ का द्वार है,
*जहाँ दिव्य, और ममता का अनुभव हो, वो माँ का द्वार है,,

जगदेई स्थल केवल एक धार्मिक तीर्थ नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो प्रकृति, श्रद्धा और संस्कृति के त्रिवेणी संगम की अनुभूति कराता है। यहाँ आकर न केवल शरीर को विश्राम मिलता है, बल्कि आत्मा को भी एक नयी ऊर्जा मिलती है…

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