उत्तरकाशी //विवेक सिंह सजवाण

उत्तरकाशी की प्रसिद्ध पंचकोसी वारुणी यात्रा इस बार 27मार्च गुरुवार  को है। इस प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा का शुरुआत बड़ेथी चुंगी में वरुण गंगा व गंगा  के संगम पर स्नान कर  पदयात्रा से होगा।  यह मानना है कि पंचकोसी वारुणी यात्रा पूरी करने वाले  श्रद्धालु की मनोकामना पूर्ण होती है।पंचकोसी की यात्रा चीड़, देवदार, बांज, बुरांश के घने जंगलों के बीच होते हुए लगभग 14किमी का पैदल पदयात्रा है।

सदियों से चली  परंपरा के अनुसार हर साल चैत्र मास की त्रयोदशी को  पंचकोसी वारुणी यात्रा आयोजित की जाती है। जिसमें वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा की जाती है।



यात्रा बसूंगा, साल्ड, ज्ञाणजा, वरुणावत के शीर्ष, संग्राली, पाटा होते हुए गंगोरी में अस्सी गंगा और गंगा भागीरथी के संगम पर पहुंचती है। जहाँ श्रद्धालु संगम पर स्नान कर उत्तरकाशी नगर स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर समेत तमाम मंदिरों में पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।


14किमी की पैदल पदयात्रा के दौरान श्रद्धालु प्राचीन मंदिर पंचकोसी वारुणी यात्रा मार्ग पर बड़ेथी संगम पर स्थिति वरुणेश्वर महादेव, बसूंगा में बासू कंडार, साल्ड में जगन्नाथ एवं अष्टभुजा ज्वाला देवी, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर महादेव एवं व्यास कुंड, वरुणावत शीर्ष पर शिखरेश्वर, राजराजेश्वरी एवं विमलेश्वर महादेव, संग्राली में कंडार देवता, पाटा में नर्मदेश्वर महादेव, गंगोरी त्रिवेणी घाट पर गंगेश्वर, लक्षेश्वर,  महिषासुर मर्दिनी, कंडार देवता, परशुराम, अन्नपूर्णा, भैरव, गोपेश्वर महादेव, शक्ति मंदिर, हनुमान मंदिर, कीर्तेश्वर महादेव, काशी विश्वनाथ एवं मणिकर्णिका घाट स्थित गंगा मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।

Trending