उत्तरकाशी / विवेक सिहं सजवाण

भारत गाँवों का देश है, जहाँ आत्मनिर्भरता और श्रम की महत्ता सदैव सर्वोपरि रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए टिहरी गढ़वाल जनपद के ग्राम कफलोग, पट्टी धारमण्डल निवासी रोहित ने अपने आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।


घराट समुह के संस्थापक अनिल डंगवाल ने हमे बाताया की जहाँ आज अधिकांश युवा सरकारी और निजी नौकरियों की होड़ में दौड़ रहे हैं, वहीं रोहित ने अपने हुनर को रोजगार का साधन बनाकर न केवल खुद को बल्कि दूसरों को भी आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की ठानी है। अपनी स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ देहरादून के मोथरोवाला रोड स्थित उत्तराखंड पशुधन भवन के सामने उन्होंने एक नाई की दुकान किराए पर लेकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया है।



रोहित का यह प्रयास केवल उनकी जीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने साथ कुछ अन्य युवाओं को भी रोजगार देने की योजना बना रहे हैं, जिससे वे देश की आर्थिक उन्नति में भी भागीदार बन सकें। उनका मानना है कि हुनर की कोई सीमा नहीं होती, और यदि उसे समर्पण व परिश्रम के साथ अपनाया जाए, तो यह सफलता की नई ऊँचाइयों तक ले जा सकता है।



उनका यह साहसिक निर्णय समाज में स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को एक नई दिशा देने वाला है। रोहित की यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक उदाहरण है, जो अपने पैरों पर खड़ा होने का सपना देखते हैं और उसे अपने कौशल व मेहनत से हकीकत में बदलने का जज़्बा रखते हैं।

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