उत्तरकाशी /विवेक सिंह सजवाण

चावल के आटे से बनाई जाने वाली उत्तराखंड की पारम्परिक मिठाई अरसे से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं अपनी आर्थिकी को मजबूत कर रही है।

                     👆अरसा 👆
पहाड़ी मिठाई अरसा का प्रचलन सदियों से उत्तराखंड मे चल आ रहा है।गढ़वाल में हर शुभ कार्य में अरसा बनाना शुभ माना जाता है। माघ माह में जब बेटियां अपने मायके आती है तो कलयओ मे अरसा दिया जाता है। अरसा,चालव गुड तिल से बनाये जाते हैं।उत्तर काशी में अजय बडोला ने विगत तीन साल पहले स्वयं साहयता समुह की महिलाओं को इस पहाडी मिठाई अरसा बनाने के लिए प्रेरित किया व उन को बाजार दिलाने का काम किया।

                        👆रोटाने👆

कालिका स्वयं साहयता समुह व गायत्री महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस माह लगभग दो कुंतल से अधिक पहाडी मिठाई अरसा बनाया है। महिलाएं घर बैठकर रोजगार कर रही है।अजय बडोला ने बताया कि स्वयं साहयता समुह की महिलाओं को यदि सरकार बजार उपलब्ध कराये तो महिलाओ के लिये एक बहुत बड़ा स्वरोजागर हो सकता है।सरकारी विभागों में अरसा के साथ -साथ चोलाई लड्डू, कोदे के आटे की बिसकुट,रोटाने का प्रशिक्षण दे कर घरेलु उद्योग खुल सकता हैं।

                     👆 कोदो के बिस्कुट👆

प्रतिभाओ की कमी नहीं है उन का सही मार्ग दर्शन करने की आवश्यकता है। पहाड़ी मिठाई अरसा देहरादून हरिद्वार जयपुर भी भेजे जा रहे हैं उत्तरकाशी में भी पहाड़ी मिठाई अरसा की मांग बढ़ रही है जिससे की यहां के लोगों को व्यापार भी मिल रहा है। हर साल इसकी मांग बढ़ रही है जिससे खासकर महिलाओं की आर्थिक का मजबूत हो रही है

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